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विजयादशमी विशेष : राम का पता नहीं, पर रावण अभी तक जिंदा है!

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                      --- प्रदीप बहुगुणा 'दर्पण' हर साल दशहरा आता है। मैदान में रावण का पुतला खड़ा किया जाता है। उसके दस सिरों पर बुराई के दस चेहरे चिपका दिए जाते हैं। फिर राम के हाथों अग्निबाण छूटता है, पटाखे फूटते हैं और रावण धू-धू कर जलने लगता है। तालियां बजती हैं, भीड़ खुश होती है और लोग घर लौट जाते हैं। अगले दिन अखबारों में रावण दहन की तस्वीरें छपती हैं। लेकिन एक सवाल है, जो हर साल राख के ढेर से उठकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—जब रावण हर साल जलाया जाता है, तो वह जिंदा कैसे बच जाता है? और राम आखिर हैं कहां? दरअसल, हमने रावण के पुतले को मैदान में खड़ा करना, प्रतीकात्मक रूप से उसे मारना और जलाना तो सीख लिया है, लेकिन अपने भीतर बैठे रावण को पहचानना नहीं सीखा। हम बुराई के पुतले जलाते हैं, मगर बुराइयों को पालते रहते हैं। रावण अमर नहीं है, बल्कि वास्तव में हम उसे मारने के लिए तैयार ही नहीं हैं। हम चाहते हैं कि दुनिया से बुराई मिट जाए, लेकिन उसकी शुरुआत हमसे न हो। राम और रावण की कथा केवल त्रेतायुग की कहानी नही...

दो सौ से भी अधिक पुस्तकों के रचनाकार प्रो. नन्दकिशोर ढौंडियाल ‘अरुण’ के साहित्यिक योगदान पर प्रकाशित होगा अभिनंदन ग्रंथ

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कोटद्वार, 19 अक्टूबर। हिंदी साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. नन्दकिशोर ढोंडियाल ‘अरुण’ के साहित्यिक योगदान और दीर्घकालीन साहित्य सेवा को सम्मानित करने के लिए उनके नाम पर अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित किया जाएगा। इस संबंध में गढ़वाली चौक, ध्रुवपुर में आयोजित बैठक में ‘हिंदी साहित्य के वट-वृक्ष प्रो. नन्दकिशोर ढोंडियाल ‘अरुण’ डी.लिट् अभिनंदन ग्रंथ समिति’ का गठन किया गया। समिति का उद्देश्य प्रो. ढोंडियाल के साहित्यिक अवदान को व्यापक स्तर पर सामने लाना तथा उनके रचनात्मक कार्यों का परिचय और मूल्यांकन पाठकों एवं साहित्य जगत तक पहुंचाना है। 201 से अधिक पुस्तकों का कर चुके हैं सृजन प्रो. नन्दकिशोर ढोंडियाल ‘अरुण’ अब तक 201 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनके व्यापक योगदान को देखते हुए साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने उनके सम्मान में अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित करने की पहल की है। बैठक में उपस्थित साहित्यकारों ने कहा कि उनके साहित्यिक व्यक्तित्व और कृतित्व का समुचित परिचय तथा मूल्यांकन अभी व्यापक स्तर पर सामने आना बाकी है। समिति में प्रकाश चन्द्र कोठारी और डॉ. मन...

राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना की प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

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देहरादून, 19 अक्तूबर।  जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), देहरादून के तत्वावधान में राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (एनपीईपी) वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जनपद स्तरीय विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता और सामाजिक विषयों के प्रति समझ का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं का आयोजन डायट के प्राचार्य गोविन्द राम जायसवाल के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत लोक नृत्य, रोल प्ले, समूह चर्चा और पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता, स्वास्थ्य संबंधी समझ, जीवन-कौशल, जिम्मेदार नागरिकता तथा समसामयिक सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना था। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही विभिन्न सामाजिक विषयों पर विचार साझा करने का अवसर मिला। प्रतियोगिताओं के परिणामों में रोल प्ले में राजकीय बालिका इंटर कॉले...

एनसीईआरटी में जुटेंगे देशभर के साहित्यकार, उत्तराखंड से डॉ. उमेश चमोला और डॉ. मंजू पाण्डे करेंगी शिरकत

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देहरादून, 10 अक्टूबर । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), नई दिल्ली की ओर से छोटे बच्चों के लिए तैयार की जा रही पुस्तक ‘बालपन की कविता’ की समीक्षा के लिए देशभर के चयनित साहित्यकार नई दिल्ली में जुटेंगे। 12 से 14 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाली इस समीक्षा प्रक्रिया में उत्तराखंड के साहित्यकार डॉ. उमेश चमोला और डॉ. मंजू पाण्डे भी प्रतिभाग करेंगे। ‘बालपन की कविता’ पुस्तक की समीक्षा के लिए 12 से 14 अक्टूबर तक नई दिल्ली में होगा आयोजन एनसीईआरटी की इस पहल का उद्देश्य छोटे बच्चों के लिए उनकी आयु, रुचि और सहज अभिव्यक्ति के अनुरूप बाल साहित्य विकसित करना है। प्रस्तावित पुस्तक में खेल गीत, लोरी गीत, बाल पहेलियों सहित बच्चों की दुनिया से जुड़े विविध रचनात्मक विषयों को शामिल किया जाएगा। इसके माध्यम से बच्चों में भाषा के प्रति रुचि विकसित करने, उनकी कल्पनाशीलता को प्रोत्साहित करने और सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाने पर जोर दिया जाएगा। पुस्तक की समीक्षा और निर्माण संबंधी यह कार्य एनसीईआरटी की राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र की विभागाध्यक्ष एवं प्रभारी प्रोफेसर ऊषा शर्मा के मा...

डायट देहरादून में प्रवक्ताओं का तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, शैक्षिक गुणवत्ता सुधार पर जोर

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देहरादून, 8 अक्टूबर। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), देहरादून में जनपद के भौतिक विज्ञान, भूगोल एवं अंग्रेजी विषय के प्रवक्ताओं के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का 8 अक्टूबर 2026 को सफलतापूर्वक समापन हो गया।  प्रशिक्षण में शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, विद्यार्थी केंद्रित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के साथ विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, दक्षता आधारित आकलन और नशा मुक्त विद्यालय परिसर जैसे विषयों पर हुआ मंथन दिनांक 6 से 8 अक्टूबर तक चले तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020, PARAKH, दक्षता आधारित आकलन, नशा मुक्त विद्यालय परिसर, शिक्षक आचरण संहिता तथा सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विषयों पर सार्थक चर्चा-परिचर्चा की गई। इसके साथ ही भौतिक विज्ञान, भूगोल एवं अंग्रेजी विषयों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं पर आधारित विभिन्न प्रकरणों के माध्यम से प्रवक्ताओं को विषयगत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।  प्रशिक्षण मे...

जन्म-मृत्यु पंजीकरण में बड़ा बदलाव, एक अक्टूबर से लागू हुआ संशोधित प्रावधान

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देहरादून, 7 अक्टूबर। जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा किए गए महत्वपूर्ण संशोधन के बाद अब उत्तराखंड में भी इसके प्रावधान प्रभावी हो गए हैं। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, उत्तराखंड की ओर से सभी मुख्य चिकित्साधिकारी एवं अपर जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को जारी पत्र में संशोधित नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। ये प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गए हैं। पत्र के अनुसार भारत सरकार के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली ने 22 सितंबर 2026 को संशोधित प्रावधानों के संबंध में राज्यों को जानकारी भेजी थी। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में बदलाव किया गया है। संशोधित अधिनियम 6 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। दो वर्ष से अधिक विलंब पर अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी, एक से दो वर्ष के बीच जिला स्तर पर होगा पंजीकरण संशोधन के बाद विलंब से जन्म अथवा मृत्यु का पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। अब घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो ...

शिक्षक केवल अपना विषय ही नहीं पढ़ाते, बल्कि विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ते हैं: जायसवाल

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देहरादून, 6 अक्टूबर।  समग्र शिक्षा अभियान के तहत जनपद देहरादून के भौतिक विज्ञान, भूगोल और अंग्रेजी विषय के प्रवक्ताओं के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का रविवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), देहरादून में शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण में तीनों विषयों के करीब 80 प्रवक्ता प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों की विषयगत एवं शैक्षिक दक्षताओं को बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संस्तुतियों को प्रभावी रूप से कक्षा-कक्ष तक पहुंचाना है। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डायट के प्राचार्य गोविंद राम जायसवाल ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार शिक्षक की सक्रिय और प्रभावी भूमिका के बिना संभव नहीं है। शिक्षक केवल विषय-वस्तु का संप्रेषण करने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मकता, जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, जीवन कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने वाला मार्गदर्शक है। उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण को महज औपचारिक गतिविधि न मानकर इसे अपने व्यावसायिक विकास का माध्यम बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनपद देहरादून को ...