उत्तराखंड में कौशलम् पाठ्यक्रम: सत्र 2025–26 में व्यावसायिक शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

उत्तराखंड के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में संचालित कौशलम् कार्यक्रम आज शिक्षा के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभर रहा है। शैक्षिक सत्र 2025–26 में इस कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विविध गतिविधियों, प्रशिक्षणों और शैक्षिक भ्रमणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह युवा राज्य अब केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक जीवन के लिए तैयार करने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है।

कौशलम् कार्यक्रम की अवधारणा और उद्देश्य

कौशलम् कार्यक्रम का मूल उद्देश्य शिक्षा को जीवनोपयोगी बनाना है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों से जोड़ते हुए उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि “करके सीखने” (Learning by Doing) की पद्धति पर प्रशिक्षण दिया जाता है।

इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुसार उन्हें विभिन्न कौशलों से जोड़ता है। इससे न केवल उनकी प्रतिभा का विकास होता है, बल्कि वे अपने भविष्य में जीविकोपार्जन को लेकर भी अधिक स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित कर पाते हैं।

इसके माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, नवाचार, समस्या समाधान क्षमता और नेतृत्व कौशल जैसे गुण विकसित किए जा रहे हैं, जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार करते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में कौशलम्

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव की नींव रखी है। इस नीति का एक प्रमुख उद्देश्य है—शिक्षा को कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख बनाना।

कौशलम् कार्यक्रम इस नीति के उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने का एक सशक्त उदाहरण है। विशेष रूप से कक्षा 6 से 8 के स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को शामिल करने की जो परिकल्पना की गई है, वह विद्यार्थियों को प्रारंभिक अवस्था से ही व्यावहारिक जीवन के लिए तैयार करती है।

इस नीति के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव देने के लिए इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा और स्थानीय उद्योगों से जुड़ाव पर बल दिया गया है। उत्तराखंड में कौशलम् कार्यक्रम इन सभी पहलुओं को प्रभावी रूप से लागू कर रहा है।

इस प्रकार यह कार्यक्रम न केवल नीति के उद्देश्यों को पूरा कर रहा है, बल्कि उन्हें वास्तविकता में परिवर्तित करने का कार्य भी कर रहा है।

उद्यमिता रोमांच शिविर 2025: अनुभव, सीख और परिवर्तन

शैक्षिक सत्र 2025–26 की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक था—गुजरात के गांधीनगर स्थित Entrepreneurship Development Institute of India में आयोजित “उद्यमिता रोमांच शिविर”।

दिनांक 24 से 29 नवम्बर 2025 के बीच आयोजित इस शिविर ने विद्यार्थियों के जीवन में एक नया दृष्टिकोण विकसित किया। यह कार्यक्रम Pandit Sundarlal Sharma Central Institute of Vocational Education और SCERT उत्तराखंड के संयुक्त प्रयासों का परिणाम था।

इस शिविर में उत्तराखंड के चार जनपदों से चयनित 20 विद्यार्थियों ने भाग लिया। ये सभी विद्यार्थी अपने-अपने विद्यालयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले थे और उद्यमिता के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते थे।

शिविर के दौरान विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक सोच है—एक ऐसा दृष्टिकोण जो समस्याओं को अवसर में बदलने की क्षमता देता है।

गतिविधियाँ: सीखने का जीवंत अनुभव

इस शिविर की सबसे बड़ी विशेषता थी इसकी गतिविधि आधारित संरचना। यहाँ विद्यार्थियों को केवल सुनने या देखने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।

ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से विद्यार्थियों ने विभिन्न सामाजिक और आर्थिक विषयों पर विचार-विमर्श किया। इससे उनकी तार्किक क्षमता और अभिव्यक्ति कौशल में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

क्रिटिकल और क्रिएटिव थिंकिंग से संबंधित गतिविधियों ने विद्यार्थियों को समस्याओं को नए दृष्टिकोण से देखने और उनके अभिनव समाधान खोजने की प्रेरणा दी।

कम्युनिकेशन और कोलैबोरेशन गतिविधियों ने टीम वर्क की भावना को मजबूत किया। विद्यार्थियों ने सीखा कि किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास कितना महत्वपूर्ण होता है।

टाइम मैनेजमेंट और नेतृत्व से संबंधित अभ्यासों से इन विद्यार्थियों ने जीवन में अनुशासन और लक्ष्य निर्धारण का महत्व भी समझा।

विद्यार्थियों का अनुभव और मार्गदर्शक शिक्षकों की भूमिका

22 से 29 नवम्बर 2025 के बीच आयोजित शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा।

विशेष रूप से यह तथ्य उल्लेखनीय है कि 20 में से 18 विद्यार्थियों ने पहली बार ट्रेन यात्रा की। यह अनुभव उनके लिए अत्यंत रोमांचक और अविस्मरणीय रहा।

इस यात्रा के दौरान विद्यार्थियों ने न केवल नए स्थानों को देखा, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता को भी समझा। इससे उनके दृष्टिकोण में व्यापकता आई और वे अधिक आत्मविश्वासी बने।

ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले इन विद्यार्थियों के लिए यह यात्रा उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।इस कार्यक्रम में SCERT उत्तराखंड के अधिकारियों और कार्यक्रम समन्वयक सुनील भट्ट के साथ – साथ मार्गदर्शक शिक्षकों की उल्लेखनीय भूमिका रही।  उत्तराखंड के 4 जनपदों से कुल 20 विद्यार्थियों का चयन किया गया। राज्यस्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर रा.इ.का. मुस्टिकसौड़, उत्तरकाशी, पीएम श्री रा.इ.का. गरुड़, बागेश्वर ,रा.बा.इ.का. कारगी, देहरादून तथा पीएम श्री रा.बा.इ.का. चम्पावत से
से 5-5 विद्यार्थी तथा 1-1 एस्कॉर्ट शिक्षक ने सहभागिता की।

एस्कॉर्ट शिक्षकों के रूप में भुवनेश्वरी फोनिया, अपर्णा रावत, भगवती रावत और विजयलक्ष्मी ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया।

एस्कॉर्ट शिक्षकों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें हर कदम पर प्रेरित किया। उन्होंने न केवल विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उन्हें सीखने के लिए प्रोत्साहित भी किया। उनके अनुभव और मार्गदर्शन ने विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाने में सहायता प्रदान की।

kaushalam pathykram in uttakhand

कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखंड वंदना गर्ब्याल ने  कहा कि यह पहल हमारे युवाओं को नई तकनीक और व्यावसायिक नवाचारों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण कदम है। अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी के अनुसार यह टूर केवल यात्रा नहीं, बल्कि सीखने और उन्नति करने के एक प्लेटफॉर्म के रूप में भी सार्थक साबित हुआ। कार्यक्रम समन्वयक एवं एससी ईआरटी उत्तराखंड के संकाय सदस्य सुनील भट्ट ने बताया कि उत्तराखंड राज्य के लिए गौरव का विषय है कि कौशलम् कार्यक्रम अब राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तराखंड के इस नवाचारपूर्ण प्रयास की सराहना देश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा भी की गई है।

शिक्षकों की क्षमता निर्माण हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम

10 से 14 नवम्बर 2025 तक भोपाल में आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के चुनिंदा शिक्षकों को व्यावसायिक शिक्षा के नवीन आयामों से परिचित कराया।

इस प्रशिक्षण में शिक्षकों को यह सिखाया गया कि किस प्रकार वे कक्षा में कौशल आधारित शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं।

इस प्रकार कौशलम कार्यक्रम केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षकों की क्षमता निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

 

अन्य प्रयास और उपलब्धियां

इसके अतिरिक्त मई 2025 में एससीईआरटी उत्तराखंड के 15 सदस्यों के राज्य संदर्भ समूह के साथ कार्यक्रम की जानकारी और शिक्षक प्रशिक्षण गतिविधियों की पूरी रूपरेखा साझा की गई। जिसके आधार पर राज्य स्तर पर मुख्य संदर्भदाता प्रशिक्षण का आयोजन किया गया । शैक्षिक सत्र के दौरान राज्य भर में प्रत्येक विद्यालय में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसी कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद स्तर पर 6127 शिक्षकों का प्रशिक्षण भी इसी सत्र में संपादित कराया गया। सभी जनपदों में कौशलम पाठ्यक्रम शिक्षक संदर्शिका और छात्र कार्य पुस्तिकाएं भी उपलब्ध कराई गई।

दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 की अवधि में विद्यालय स्तर पर ग्रैंड फिनाले आयोजित किए गए जहां छात्रों ने स्थानीय समुदाय के समक्ष अपने प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन किया। राज्य के 500 विद्यालयों को उनके व्यावसायिक प्रोजेक्ट को बेहतर बनाने के लिए प्रति विद्यालय ₹5000 की सहयोग राशि भी प्रदान की गई। एससीईआरटी और उद्याम लर्निंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वधान में 23 मई 2025 को राज्य स्तरीय एक्सपो का आयोजन भी किया गया जिसमें पूरे राज्य से 47 विद्यालयों की दो सदस्य टीमों ने प्रतिभाग किया।

प्राकृतिक उत्पादों और हस्तशिल्प को बढ़ावा

राज्य के विभिन्न विद्यालयों में कुशलम पाठ्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय सामग्री का सदुपयोग करते हुए प्राकृतिक और हस्तशिल्प आधारित उत्पाद तैयार किया जा रहे हैं जिनमें,: चीड़ की पत्तियों, बांस और रिंगाल से बनी कलात्मक वस्तुएं, स्थानीय फलों से बने अचार और जैम औषधीय पौधों और जड़ी बूटियां से बनी हर्बल चाय,प्राकृतिक सामग्री से बने स्किन केयर उत्पाद पारंपरिक हस्तशिल्प पर आधारित कलात्मक और सजावटी वस्तुएं प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त एलईडी बल्ब, सजावटी इलेक्ट्रॉनिक्स सामग्री, कार्यात्मक वेबसाइट डिजाइनर बर्ड हाउस और हस्तनिर्मित कपड़े भी विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए हैं।

इनके आधार पर प्रसिद्ध कंपनी फैब इंडिया ने भी कुछ बच्चों को रोजगार उपलब्ध कराया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को साकार करते हुए कौशलम् कार्यक्रम वास्तव में उत्तराखंड के युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रहा है। राज्य में कौशलम् कार्यक्रम के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। विद्यार्थियों की सोच में परिवर्तन आया है। अब वे केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वयं रोजगार सृजित करने के बारे में भी सोच रहे हैं।उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है, संवाद कौशल बेहतर हुआ है और वे नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। यह कार्यक्रम उन्हें 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों से लैस कर रहा है, जो उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

उत्तराखंड में कौशलम् केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक विचार बनकर उभरा है—“सीखने से कमाने तक और कमाने से आगे बढ़ने तक।”

उत्तराखंड के ये युवा अब भविष्य के उद्यमी हैं और यही है नए भारत की पहचान।

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